Rajasthan High Court News: जयपुर, 1 मई।  राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।

धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई और 185 लोग घायल हुए थे

13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था। इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी और 185 लोग घायल हुए थे। पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था। इसी जिंदा बम मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है, ऐसे में जिंदा बम मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं। धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। ई-मेल के जरिए धमाकों को सही ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा। इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

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